किस उंगली से किसको तिलक लगाना चाहिए?
कया अङ्गुल्या कस्मै च तिलकं धारणीयम्?
••भगवत:,गुरो: वा अन्यस्य कस्यचित् जनस्य शुभकामनायै अनामिकया अङ्गुल्या तिलकं करणीयम्।एषा मानसिकशक्तिं दृढां करोति यतोहि एतस्या: अङ्गुल्या: सूर्येण सह साक्षात् सम्बन्ध: अस्ति।अनया अङ्गुल्या तिलककरणेन आज्ञाचक्रं जागरितं भवति।
••मध्यमाङ्गुली शनिग्रहेण सम्बन्धिता कथ्यते।शास्त्रानुसारं मध्याङ्गुलेन आत्मनः ललाटे तिलककरणाय प्रयोज्यात्।
यदा प्रतिदिनं भवान् पूजनं करोति तदा भवान् तर्जन्या अङ्गुल्या भगवत: तिलकलेपनान्तरं स्वयमेव स्वललाटे तिलकलेपनं कर्तुं शक्नोति।
••प्रदेशिन्यङ्गुली केवलं मृतकानां तिलकलेपनप्रयोगाय भवति यस्मात् मृतकात्मा: मोक्षं लभेरन्।एतस्या: अङ्गुल्या: सम्बन्ध: बृहस्पतिग्रहेण सह भवति।
••अङ्गुष्ठ: शुक्रग्रहेण सम्बंधितो भवति शुक्रग्रहश्च कीर्तिधनादिप्राप्ते: कारको मन्यते।दशहरा-रक्षाबंधनादिपर्वसु स्वसार: स्वभ्रातॄणां विजयकामनां कुर्वत्य: तेषाम् अंगुष्ठेन एव तिलकलेपनं करोति।पूर्वकाले अपि यदा राजान: युद्धाय गच्छन्ति स्म तदा राज्ञ्य: अङ्गुष्ठेन एव राज्ञां ललाटेषु विजयतिलकलेपनं कुर्वन्ति स्म। यदि भवान् अन्यस्य जनस्यस्य ललाटे तिलकं लेपयितुम् इच्छेत् तर्हि अङ्गुष्ठेन तिलकलेपनं कुर्यात्।
••सर्वासु अङ्गुलीषु कनिष्ठतमायाः अङ्गुल्याः उपयोगः तिलकलेपनाय न क्रियते।अपि च एतस्या: अङ्गुल्या: उपयोगः कस्मिंश्चिदपि शुभकार्य्ये निषिद्धो मन्यते।एषा अङ्गुली बुधग्रहेण सम्बधिता भवति।
किस उंगली से किसको तिलक लगाना चाहिए?
अनामिका उंगली से भगवान, गुरु या किसी अन्य व्यक्ति की मंगल कामना के लिए तिलक करना चाहिए। यह मानसिक शक्ति को प्रबल बनाता है क्योंकि इस उंगली का संबंध सीधा सूर्य से होता है। इस उंगली से तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है।
मध्यमा उंगली का संबंध शनि ग्रह से बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार मध्यमा उंगली का प्रयोग खुद को तिलक लगाने के लिए करना चाहिए। जब प्रतिदिन आप पूजा करें तो अनामिका से भगवान को तिलक लगाने के बाद मध्यमा उंगली से खुद को तिलक कर सकते हैं।
तर्जनी उंगली का प्रयोग केवल मृत व्यक्ति को तिलक लगाने के लिए किया जाता है ताकि मृतक की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो।इस उंगली का संबंध गुरु ग्रह से होता है।
अंगूठे का संबंध शुक्र ग्रह से होता है और शुक्र ग्रह यश और धन-वैभव के कारक माने जाते हैं। दशहरा और रक्षाबन्धन जैसे त्योहार पर बहनें अपने भाई की विजयकामना करते हुए उन्हें अंगूठे से ही तिलक लगाती है। पहले भी जब राजा युद्ध पर जाते थे तो रानियां अंगूठे से ही राजा के मस्तक पर विजय तिलक करती थीं। यदि किसी दूसरे व्यक्ति को तिलक लगाना हो तो आपको अंगूठे से तिलक लगाना चाहिए।
सबसे छोटी उंगली का उपयोग तिलक लगाने में नहीं किया जाता है। यहां तक कि किसी भी शुभ कार्य में इस उंगली का प्रयोग वर्जित बताया गया है। इस उंगली का संबंध बुध ग्रह से होता है।
କେଉଁ ଆଙ୍ଗୁଠିରେ ତିଲକ ଲଗାଇବା ଉଚିତ୍?
ଭଗବାନ, ଗୁରୁ କିମ୍ବା ଅନ୍ୟ କୌଣସି ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କୁ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଇବା ପାଇଁ ତିଲକ ଅନାମିକା ଆଙ୍ଗୁଠି (ହାତର ଚତୁର୍ଥ ଅଙ୍ଗୁଳି ) ବ୍ଯବହାର କରଯିବା ଉଚିତ୍ | ଏହା ମାନସିକ ଶକ୍ତିକୁ ଦୃଢ କରିଥାଏ କାରଣ ଏହି ଆଙ୍ଗୁଠି ସୂର୍ଯ୍ୟ ସହିତ ସିଧାସଳଖ ଜଡ଼ିତ | ଏହି ଆଙ୍ଗୁଠିରେ ତିଲକ ପ୍ରୟୋଗ କରିବା ଆଜ୍ଞା ଚକ୍ରକୁ ଜାଗ୍ରତ କରେ |
ମଧ୍ଯମା ଆଙ୍ଗୁଠି (ମଝି ଆଙ୍ଗୁଠି)ଶନି ଗ୍ରହ ସହିତ ଜଡିତ ବୋଲି କୁହାଯାଏ | ଶାସ୍ତ୍ର ଅନୁଯାୟୀ, ନିଜେ ତିଲକ ଲଗାଇବା ପାଇଁ ମଧ୍ୟମ ଆଙ୍ଗୁଠି ବ୍ୟବହାର କରାଯିବା ଉଚିତ୍ | ପ୍ରତିଦିନ ପୂଜା କରିବା ସମୟରେ, ଅନାମିକା ଆଙ୍ଗୁଠିରେ ଭଗବାନଙ୍କ ନିକଟରେ ତିଲକ ପ୍ରୟୋଗ କରିବା ପରେ, ତୁମେ ନିଜ ମଧ୍ଯମା ଆଙ୍ଗୁଠିରେ ତିଲକ ଲଗାଇବା ଉଚିତ |
ତର୍ଜନୀ ଆଙ୍ଗୁଠି (ଦ୍ବିତୀୟ ଅଙ୍ଗୁଳି) କେବଳ ମୃତ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କୁ ତିଲକ ପ୍ରୟୋଗ କରିବା ପାଇଁ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ ଯାହା ଦ୍ୱାରା ମୃତଙ୍କ ଆତ୍ମା ପରିତ୍ରାଣ ପାଇଥାଏ |
ବୁଢ଼ା ଅଙ୍ଗୁଳି (ହାତର ପ୍ରଥମ ଅଙ୍ଗୁଳି) ଶୁକ୍ର ଗ୍ରହ ସହିତ ଜଡିତ ଏବଂ ଶୁକ୍ର ଗ୍ରହ ଖ୍ୟାତି ଏବଂ ଧନର କାରଣ ବୋଲି ବିବେଚନା କରାଯାଏ | ଦଶହରା ଏବଂ ରକ୍ଷାବନ୍ଧନ ଭଳି ପର୍ବରେ ଭଉଣୀମାନେ ତାଙ୍କ ଭାଇଙ୍କୁ ବୁଢା ଆଙ୍ଗୁଠିରେ ତିଲକ ଲଗାନ୍ତି ଏବଂ ତାଙ୍କ ବିଜୟ କାମନା କରନ୍ତି | ଏହାପୂର୍ବରୁ, ଯେତେବେଳେ ରାଜା ଯୁଦ୍ଧକୁ ଯାଇଥିଲେ, ରାଣୀମାନେ ବିଜୟ ତିଲକଙ୍କୁ ବୁଢା ଆଙ୍ଗୁଠିରେ ରାଜାଙ୍କ କପାଳରେ ଲଗାଉଥିଲେ। ଯଦି ଅନ୍ୟ କେହି ତିଲକ ପ୍ରୟୋଗ କରିବାକୁ ଚାହାଁନ୍ତି, ତେବେ ତୁମେ ତୁମ ଆଙ୍ଗୁଠିରେ ତିଲକ ପ୍ରୟୋଗ କରିବା ଉଚିତ୍ |
ଛୋଟ ଆଙ୍ଗୁଠି ତିଲକ ପ୍ରୟୋଗ ପାଇଁ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ ନାହିଁ | ଏପରିକି କୌଣସି ଶୁଭ କାର୍ଯ୍ୟରେ ଏହି ଆଙ୍ଗୁଠି ବ୍ୟବହାର କରିବାକୁ ନିଷେଧ ବୋଲି କୁହାଯାଏ | ଏହି ଆଙ୍ଗୁଠି ବୁଧ ଗ୍ରହ ସହିତ ଜଡିତ |


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