संदेश

मई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Sanskrit is the second most popular language in Odisha after Odia language

चित्र
ସଂସ୍କୃତ ଓଡ଼ିଶାରେ ଦ୍ୱିତୀୟ ଲୋକପ୍ରିୟ ଭାଷା *) ସଂସ୍କୃତ ଶିକ୍ଷାଦାନ ନିମନ୍ତେ ଓଡ଼ିଶାରେ ୧୭୦ଟି ସଂସ୍କୃତ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ରହିଛି  | *) ସଂସ୍କୃତ ଶିକ୍ଷାଦାନ ନିମନ୍ତେ ଓଡ଼ିଶାର ୨୩ ଜିଲ୍ଲାରେ ୧୩,୩୩୨ ଟି ସିଟ୍ ରହିଛି | *) କଳା (+୨ Art's) ପରେ ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀଙ୍କ ଦ୍ୱିତୀୟ ପସନ୍ଦ ସଂସ୍କୃତ (ଉପଶାସ୍ତ୍ରୀ ) | *) ବାଲେଶ୍ଵର ରେ ସର୍ବାଧିକ ୨୭ଟି , କେନ୍ଦ୍ରାପଡ଼ା ୨୬ଟି , ପୁରୀ ୨୧ଟି ଓ ଯାଜପୁରରେ ୨୧ ଟି ସଂସ୍କୃତ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ରହିଛି । *) ବୌଦ୍ଧ, ଢେଙ୍କାନାଳ, ଝାରସୁଗୁଡ଼ା, ମାଲକାନଗିରି, ନବରଙ୍ଗପୁର, ନୂଆପଡ଼ା , ସମ୍ବଲପୁର ଓ ସୋନପୁର ଜିଲ୍ଲାରେ ଗୋଟିଏ ମଧ୍ୟ ସଂସ୍କୃତ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ନାହିଁ । *) ଅଧ୍ୟାପକ , ଅଭାବ ଯୋଗୁଁ ପ୍ରତିବର୍ଷ ଛାତ୍ର ଛାତ୍ରୀ ସଂଖ୍ୟା କମିବାରେ ଲାଗିଛି | *) ଓଡ଼ିଶାରେ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସଂସ୍କୃତ ଶିକ୍ଷା ବ୍ୟବସ୍ଥା କୁ ଉପଶାସ୍ତ୍ରୀ ବୋଲି କୁହାଯାଏ | *)  ସଂସ୍କୃତ ଭାଷାର ବିକାଶ ପାଇଁ ଓଡିଶାରେ ଗୋଟିଏ ମାତ୍ର ସଂସ୍କୃତ ବିଶ୍ଵବିଦ୍ୟାଳୟ ରହିଛି | *)  ଶ୍ରୀ ଜଗନ୍ନାଥ ବିଶ୍ଵବିଦ୍ୟାଳୟ ୧୯୮୧ ମସିହା ରେ ସଂସ୍କୃତ ଭାଷାର ବିକାଶ ପାଇଁ ତତ୍କାଳୀନ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଜାନକୀବଲ୍ଲଭ ପଟ୍ଟନାୟକ ସ୍ଥାପନ କରିଥିଲେ ।

कोरोनावायरस eassy in sanskrit

चित्र
  कोरोना वायरस                                                को रोना इति वायरसस्य नाम, येषु केचन मनुष्याणां कृते, केचन पशूनां कृते भयङ्कराः सन्ति । एषः रोगः यः भवतः श्वसनतन्त्रं प्रत्यक्षतया प्रभावितं करोति । सर्व्वं च जगत् अनेन रोगेन दुर्प्रभावितम्। WHO इत्यनेन एतत् महामारी इति घोषितम्। अस्य प्रारम्भिकलक्षणं ज्वर: इव भवति, यः क्रमेण भयंकरं रूपं गृह्णाति । कोरोना-लक्षण ज्वरः शीतः कासः च व्रणित कंठ शरीरस्य श्रान्तता श्वासस्य ह्रस्वता (अत्यन्तं प्रमुखम्) २. मांसपेशी कठोरता दीर्घकालं यावत् श्रान्तता कोरोनातः आत्मनः रक्षणं कथं करणीयम्      कोरोनासंक्रमणं अतीव सुलभतया प्रसरति, एतावता तस्य औषधं न लब्धम्, अतः अत्यन्तं घातकरोगस्य वर्गे स्थापितं अस्ति। सम्पूर्णे विश्वे दिने दिने कोरोना-प्रकरणाः वर्धन्ते । WHO इत्यनेन एतत् महामारी इति घोषितम्।      इतिहासः अस्य तथ्यस्य साक्षी अस्ति यत् प्रत्येकं शतवर्षेषु काचित् वा अन्यः वा महामारी निश्चितरूप...

Aranya Kanda Chapter [Sarga] 9

 Aranya Kanda  Chapter [Sarga] 9   सुतीक्ष्णेन अभ्यनुज्ञातम् प्रस्थितम् रघु नन्दनम् | हृद्यया स्निग्धया वाचा भर्तारम् इदम् अब्रवीत् || ३-९-१ अधर्मम् तु सुसूक्ष्मेण विधिना प्राप्यते महान् | निवृत्तेन च शक्यो अयम् व्यसनात् कामजाद् इह || ३-९-२ त्रीणि एव व्यसनानि अत्र कामजानि भवन्ति उत |  मिथ्या वाक्यम् तु परमम् तस्मात् गुरुतरा उभौ || ३-९-३ पर दार अभिगमनम् विना वैरम् च रौद्रता | मिथ्या वाक्यम् न ते भूतम् न भविष्यति राघव || ३-९-४ कुतो अभिलषणम् स्त्रीणाम् परेषाम् धर्म नाशनम् | तव नास्ति मनुष्येन्द्र न च आभूत् ते कदाचन || ३-९-५ मनस्यपि तथा राम न च एतत् विद्यते क्वचित् | स्व दार निरतः च एव नित्यम् एव नृपात्मज || ३-९-६ धर्मिष्टः सत्य सन्धः च पितुः निर्देश कारकः | त्वयि धर्मः च सत्यम् च त्वयि सर्वम् प्रतिष्टितम् ||३-९-७ तच्च सर्वम् महाबाहो शक्यम् वोढुम् जितेइन्द्रियैः | तव वश्य इन्द्रियत्वम् च जानामि शुभदर्शन || ३-९-८ तृतीयम् यद् इदम् रौद्रम् पर प्राण अभिहिंसनम् | निर्वैरम् क्रियते मोहात् तत् च ते समुपस्थितम् || ३-९-९ प्रतिज्ञातः त्वया वीर दण्डकारण्य वासिनाम् |  ऋषीणाम् र...